Tuesday, March 24, 2026

 

बस् इतना ही नही !

 बस् इतना ही नही


बस् इतनी ही नहींयह वाक्प्रचार हम अक्सर सुनते हैं डॉ. सुधांशु त्रिवेदीजी से. उनकी याददाश्त यकीनन काफी गहरी है क्योंकी वे कोई भी वाकया प्रसंगोपात्त सिलसिलेवार उद्धृत कर देते हैं. सुधांशुजी की छोडिये, मुझे भी अबतक देवी सरस्वती मैय्याने झोली भरभरकर वह प्रखर स्मरणश्क्ती प्रदान की है ! !


लिहाजाबस् इतना ही नहींकामतलब मुझे और भी काफीकुछ कहना है, ध्यान से सुनियेगायह होता है. अंग्रेजीमे इसे Not only that कह सकते हैं और मराठी मेंइतकंच नव्हे तरयह वाक्प्रचार इस्तेमाल होता है. मराठीमे एक और शब्द गलत तरीके से प्रचलित है - ‘किंबहुना’. इसे लोग अक्सर परंतु, किंवा या अथवा का पर्यायी शब्द मानते हैं. असल मे इसका मतलब हैऔर क्या कहा जाय’, what more can be said,  याअघिक काय सांगावेइन मराठी


देखिये, मै ना तो किसी भी एक भाषाशास्त्र का विद्वान हूं और ना ही विद्यार्थी भी ! फिर भी आज कुछ शब्दों का इस्तेमाल कर गया जो मुझे अक्सर गहरी सोच मे झकझोर देते हैं. वास्तव मे आपको कुछ और सोचने को मजबूर करने का मेरा इरादा होता रहता है लेकिन आप तो आपही ठहरे जो उस तरफ मुड के भी नहीं देखते. लेकिन फिर भी यह एटीफाईव इयर ओल्ड बालक आपको मेरा लिखा कुछ भी पढने को बाध्य करता रहता है !

रहालकर

२४ मार्च २०२६.   


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